पुस्तक समीक्षा: द फिलॉसॉफर्स स्टोन — प्रेम एस गुर्जर

पुस्तक समीक्षा: द फिलॉसॉफर्स स्टोन --- प्रेम एस गुर्जर

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‘लोग आगे बढ़ने में इतना डरते क्यों हैं? किनारे से ही हार मान लेना कितना सरल है। बहुत कम लोग होते हैं जो पूर्ण निष्ठा से अपनी नियति को प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। ‘

प्रेम एस गुर्जर  फिलॉसोफेर्स स्टोन

फिलॉसॉफर्स स्टोन कहानी है एक चरवाहे की जो अलग अलग तरह की किताबों को पढ़ने का शौक़ीन है और बड़े सपने देखने से नहीं हिचकिचाता। और ये सिर्फ जागती आँखों से देखने वाले सपने की बात नहीं — ये उस सपने की भी बात है जो चरवाहे को सोते हुए, बार-बार आते हैं। वो सपना जो उसे कहता है कि एक दिन वो राजा बनेगा। एक चरवाहा और राजा? थोड़ा अजीब है पर चरवाहा उस सपने पर यकीन कर बैठता है और निकल पड़ता है, अपने सपने, अपनी नियति की तलाश में। वो एक कारवां के साथ चलता हुआ शहर पहुँचता है। लड़के का भाग्य देखिये कि वहां कुछ ऐसा घटित होता है कि वो लड़का {लड़के का नाम है, पर लेखक ने उसे हर जगह ‘लड़का’ कहकर ही सम्बोधित किया है।}, अनजाने में, राजमहल पहुँच जाता है। उसे अपूर्व सुंदरी राजकुमारी के दर्शन भी हो जाते हैं। पर आगे क्या? क्या सिर्फ राजमहल तक पहुँच जाने से उसका सपना पूरा हो जाएगा? क्या उस लड़के को बार-बार दिखने वाले सपने का कोई मतलब भी है? इन सारे सवालों का ज़वाब जानने के लिए आपको ये किताब पढ़नी होगी। फिलॉसॉफर्स स्टोन पढ़ते वक़्त जो सबसे पहली बात मेरे दिमाग में आयी वो ये है कि ये कहानी — जिसमें एक चरवाहा है, राजकुमारी है, उनका प्यार है और एक जादुई शहर है —टीनएजर्स  के लिए ज्यादा उपयुक्त है। एक वो बात जो इस किताब को आजकल की अन्य हिंदी किताबों से अलग करती है, वो है इसकी भाषा। ऐसी भाषा जिसे हम हलकी-फुल्की भाषा नहीं कह सकते। जैसे कहानी कुछ ऐसे शुरू होती है — ‘मंदिर के धवल शिखर पर उषा की प्रथम किरण ने वंदन कर दिनारम्भ का संकेत दिया।’ इसके अलावा, कई शब्द ऐसे है जो आम पाठकों को कठिन लग सकते हैं।  इस कहानी को पढ़ते वक़्त मुझे पुरानी हिंदी कहानियों की याद आ रही थी। इस कहानी की सबसे अच्छी बात है कई खूबसूरत विचार जो आपको प्रेरित करते हैं। ‘तुम्हारे अंदर सारी सम्भावनाएं समाहित हैं। दुनिया में कोई भी चीज़ उतनी मुश्किल नहीं जितना मुश्किल तुम्हारा उसे प्राप्त करने पर यकीन करना।’

किरदारों की बात करें तो मुझे राजकुमारी मधुलिका का किरदार दिलचस्प लगा। किताब का कवर रहस्यमय है, जो कहानी के अनुरूप है।

हालांकि, कुछ बातें हैं जो मुझे इतनी पसंद नहीं आयी, जैसे कहानी बहुत सीधे और सपाट तरीके से आगे बढ़ती है। ‘उसे एक ही सपना बार-बार परेशान करता था कि वो आर्यावर्त का राजा बनना चाहता है।’ मैं जानना चाहती थी कि सपने में उसने ऐसा क्या देखा। अंग्रेजी में कहानीकारों के लिए एक बात कही जाती है — ‘शो, डोंट टेल’ —एक लेखक और एक पाठक के तौर पर मैं इसपर विश्वास करती हूँ। इस किताब में कहानी को बस कह दिया गया है, चित्रण नहीं किया गया। कुल मिलाकर, ये एक प्रेरणादायक कहानी है। कई अच्छे विचार हैं जो आपको सोचने पर मजबूर करेंगे। ‘तुम्हारी मान्यताएं चाहे सच्ची हों या झूठी, उन्हीं से तुम्हारे संसार का निर्माण होता है।’

अगर आप हिंदी किताबें पढ़ना पसंद करते हैं, अगर आप पुस्तक समीक्षा लिखते हैं, तो अपनी हिंदी समीक्षा यहाँ साझा करें।

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